शनिवार, 3 अगस्त 2013

जाहि विधि रखे राम ताहि विधि रहिये।


सीताराम सीताराम सीताराम कहिये.
जाही विधि रखें राम वाहि विधि रहिये।

मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे राम तेरे साथ में। 
विधि का विधान जान सुख दुःख सहिये। 
जाहि विधि रखे राम ताहि विधि रहिये।

करेगा अभिमान जो वह सुख नहीं पायेगा,
होगा वही मित्रों जो श्रीराम जी को भायेगा।
फल आशा त्याग शुभ काम करते रहिये ,
जाहि विधि राखें राम वाही विधि रहिये।

जिंदगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के ,
महलों में रखें चाहे झोपड़ी में वास दें।
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये,
जाहि विधि राखें राम वाही विधि रहिये।

आस एक राम जी की दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक रामजी से दूजा नाते तोड़ दे।
साधू संग राम रंग अंग अंग रंगिये।
जाहि विधि राखें राम वाही विधि रहिये।

फल आश त्याग प्यारे राम राम भजिये,
चलते फिरते सोते जागते राम राम कहिये।
सीताराम सीताराम सीताराम कहिये.
जाही विधि रखें राम वाहि विधि रहिये।

- स्वामी शिवानन्द जी "तीर्थ" / गीताघाट बाबा.

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

तुम्हारे चरणों में..

मिलता है सच्चा सुख केवल, भगवान तुम्हारे चरणों में.
गोपाल तुम्हारे चरणों में, नंदलाल तुम्हारे चरणों में..

प्रतिपाल तुम्हारे चरणों में, सत्यदेव तुम्हारे चरणों में.
विनती है पल पल क्षण क्षण, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..

चाहे कष्टों ने मुझे घेर हो, चाहे चारों ओर अँधेरा हो.
पर विचलित मन नहीं मेरा हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..

चाहे वैरी सब संसार बने, चाहे मौत गले का हार बने.
चाहे जीवन मुझ पर भार बने, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..

चाहे अग्नि में मुझे जलना हो, चाहे काँटों पर मुझे चलना हो.
चाहे छोड़ के देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..

वाणी पर तेरा नाम रहे, हाथों में सुन्दर काम रहे.
तन धन का ना अभिमान रहे, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..

- स्वामी शिवानन्द जी "तीर्थ" / गीताघाट बाबा.

सोमवार, 29 जुलाई 2013

स्वामी शिवानन्द जी तीर्थ / गीताघाट बाबा



श्री आत्माराम पूरण काम,


सब जीवों में वास करें, 



जो कोई ध्यावें शरण में आवें,


उनके संकट नाश करें.





- स्वामी शिवानन्द जी "तीर्थ"