मिलता है सच्चा सुख केवल, भगवान तुम्हारे चरणों में.
गोपाल तुम्हारे चरणों में, नंदलाल तुम्हारे चरणों में..
प्रतिपाल तुम्हारे चरणों में, सत्यदेव तुम्हारे चरणों में.
विनती है पल पल क्षण क्षण, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
चाहे कष्टों ने मुझे घेर हो, चाहे चारों ओर अँधेरा हो.
पर विचलित मन नहीं मेरा हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
चाहे वैरी सब संसार बने, चाहे मौत गले का हार बने.
चाहे जीवन मुझ पर भार बने, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
चाहे अग्नि में मुझे जलना हो, चाहे काँटों पर मुझे चलना हो.
चाहे छोड़ के देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
वाणी पर तेरा नाम रहे, हाथों में सुन्दर काम रहे.
तन धन का ना अभिमान रहे, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
- स्वामी शिवानन्द जी "तीर्थ" / गीताघाट बाबा.
गोपाल तुम्हारे चरणों में, नंदलाल तुम्हारे चरणों में..
प्रतिपाल तुम्हारे चरणों में, सत्यदेव तुम्हारे चरणों में.
विनती है पल पल क्षण क्षण, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
चाहे कष्टों ने मुझे घेर हो, चाहे चारों ओर अँधेरा हो.
पर विचलित मन नहीं मेरा हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
चाहे वैरी सब संसार बने, चाहे मौत गले का हार बने.
चाहे जीवन मुझ पर भार बने, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
चाहे अग्नि में मुझे जलना हो, चाहे काँटों पर मुझे चलना हो.
चाहे छोड़ के देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
वाणी पर तेरा नाम रहे, हाथों में सुन्दर काम रहे.
तन धन का ना अभिमान रहे, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में..
- स्वामी शिवानन्द जी "तीर्थ" / गीताघाट बाबा.

